योगी अयोध्या से चुनाव लड़ेंगे?

पूर्वांचल प्रथम संवाददाता> लखनऊ> उत्तर प्रदेश के चुनाव को लेकर जबरदस्त समां बांध रहा है। एक ओर , जहां  लखीमपुर खीरी कांड के बाद से ही प्रियंका गांधी ने लोगों का ध्यान खींच रखा है, वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव और भारतीय सुहेलदेव पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के साथ आने से पूर्वांचल में सपा को मज़बूती मिल सकती है।  लखनऊ में कांशीराम की पुण्यतिथि पर बसपा कार्यकर्ताओं का एक बड़ा जमावड़ा भी इस बात का संकेत कर रहा है कि बसपा का मूल आधार सुरक्षित है।  
बाराबंकी से शुरू हुई कांग्रेस के प्रतिज्ञा यात्रा चर्चा में है।  प्रियंका ने टिकट बंटवारे में महिलाओं के लिए ४० फीसदी सीटें तो घोषित ही की हैं, दसवीं पास के लिए स्मार्ट फ़ोन और स्नातक पास  के लिए स्कूटी देने की योजना भी आकर्षक है। बिजली का बिल आधा करने और किसानों का कर्ज़ा माफ़ करने जैसी घोषणाओं के भी अपने आकर्षण है।  यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस को यदि कोई बढ़त होती है, तो उसका नुकसान सपा को होगा या किकांग्रेस के खाते में भाजपा का कुछ वोट भी बहेगा.  हवाई जहाज ,में ही सही, प्रियंका और अखिलेश के बीच एक मुलाकात हो चुकी है, और चुनाव आते-आते यह मुलाकातः किसी बड़े समझौते में बदल सकती है, इस संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।  कुछ दिनों की कम्पैनिंग के बाद राजनीतिक दलों को जब जमीनी हकीकत ज्यादा पता होगी, तब साथ, सहयोग और समझौतों की रणनीति भी बदलेगी। इस बीच भाजपा में अलग किस्म का युद्ध या संघर्ष है।  केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार या उसके पहले से ही स्पष्ट है कि भाजपा के नए सरमायेदार जमे-जमाये नेतृत्व या पुराने कैडर को क्रियाहीन करना चाहते है। राजनीति के तपे -तपाये लोगों को छोड़कर केंद्रीय मंत्रिमंडल में ब्यूरोक्रेट्स को भरना बहुत कुछ कहनेवाला था।  उत्तर प्रदेश के टिकटार्थी जो अब लखनऊ या दिल्ली भाग रहे हैं, उनके सामने सबसे बड़ी समस्या इस बात की है कि उन्हें महत्व मिलेगा या कि कैडर को हटा कर पार्टी नयी किलेबंदी करेगी? दिल्ली में आलम यह है कि ज्यादातर लोगों का मानना है कि टिकट बंटवारे में मुख्य भूमिका केंद्रीय गृह मंत्री की होगी। यह एक अद्भुत स्थिति है, जिसमें गृह मंत्रालय के साथ-साथ वे पार्टी को संभालने में भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।  ऐसी परिस्थिति में यह जानना दिलचस्प है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पार्टी के पुराने लोगों के प्रति प्रतिबद्धता जता रहे हैं। वे कैडर के लोगों से मिल रहे हैं, उन्हें महत्व दे रहे हैं। और, समझा जा रहा है कि पुराने नेताओं-कार्यकर्ताओं को यदि टिकट मिलेंगे, तो उसके सबसे बड़े पैरवीकार योगी आदित्यनाथ ही होंगे।      
इस बीच चर्चा है कि मुख्यमंत्री अपनी सीट भी बदल रहे हैं।  वे सीधे रामलला के जन्मस्थान अयोध्या से चुनाव लड़ेंगे।  वे भाजपा के साथ-साथ श्री राम के भी  प्रतिनिधि होंगे। इसका प्रदेश और देश में  एक अलग सन्देश जाएगा।  सो नए राजनीतिक समीकरणों के लिए तैयार रहिये।  उत्तर प्रदेश का आगामी चुनाव २०२४ के लोकसभा चुनाव की भी सम्पूर्ण पृष्ठभूमि तय कर देगा।   

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